हिम साहित्यकार सहकार सभा
मकान सं० 210, रौड़ा सेक्टर 2,बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश 
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हिम साहित्यकार सहकार सभा द्वारा बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रथम लघु कथाकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष कमलेश भारतीय ने कहा कि हिमाचल में साहित्य की विधा लघुकथा को जीवंत रखने के जो प्रयास हो रहे हैं वह सराहनीय हैं उन्होंने कहा कि उन्हें बिलासपुर की धरती से प्यार है और वे यहां आकर अपनापन महसूस कर रहे हैं। उन्होंने लेखकांे से आग्रह किया कि वे बेहतर साहित्य लिखें ताकि उसे पढने वालों की कमी न रहे। उन्होंने कई लघुकथाओं का वाचन किया और कहा कि जितनी छोटी लघुकथा होगी उतना ही असर छोडेगी। इससे पहले चंडीगढ़ से आए सत्य स्वदेश के संपादक जीतेंद्र अवस्थी ने कहा कि सभा का प्रयास सराहनीय है और जिस तरह से सभा ने लेखकों के प्रकाशन को वितरित करने की ओर कदम उठाने की बात कही है वह अच्छा प्रयास कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि लघुकथा अपने आप में कुछ न कुछ छोड़ जाती है और उसके द्वारा लेखक अपनी बात सटीक तरीके से कह जाता है। इससे पहले चंडीगढ़ से ही आए साहित्यकार रतन चंद रत्नेश ने कहा कि किसी भी लघु कथा का स्वरूप छोटा ही होता है और आधे पन्ने से बड़ी कथा को लघुकथा नहीं कहा जा सकता। स मेलन में हिमाचल के विभिन्न भागों से आए 20 लेखकों ने अपनी लघुकथाओं का वाचन किया। कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से कई कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने भविष्य में ऐसे आयोजनों को सहयोग करने की बात कही। कार्यक्रम में मंडी के लेखक कृष्ण चंद्र महादेवीया की पुस्तक बेटी का दर्द तथा समारोह की स्मारिका का विमोचन भी मुख्यातिथि द्वारा किया गया। सभा के अध्यक्ष रतन चंद निर्झर व मुख्यातिथि व विशिष्ट अथितियों का शॉल व टोपी देकर सम्मान किया। महासचिव अरूण डोगरा ने बताया कि सभा लेखकों की कृतियों का प्रकाशन कर उनके वितरण की व्यवस्था भी करेगी। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी परिषद की अध्यक्ष प्रेम देवी, जिला पार्षद बसंत राम संधू, डा. तेज प्रताप पांडेय, सुभाष ठाकुर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में मंच संचालन बेहतर तरीके से सभा के उपाध्यक्ष सुभाष चंदेल ने किया 
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