हिम साहित्यकार सहकार सभा
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चिट्ठाजगत Blogvani.com हिमधारा
सोलन — पहाड़ी भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलवाने व आम जनमानस में लोकप्रिय बनाने हेतु प्रदेश भर के साहित्यकारों का दो दिवसीय सम्मेलन कुनिहार में संपन्न हो गया। आस्था बीएड कालेज के सभागार में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन के समापन समारोह के मुख्यातिथि भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक डा. देवेंद्र गुप्ता थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिरमौर के प्रसिद्ध गायक एवं साहित्यकार विद्यानंद सरैक ने की। मुख्यातिथि के रूप में संबोधित करते हुए निदेशक डा. देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि हिमाचली पहाड़ी को भारतीय संविधान के अनुच्छेद आठ में दर्जा दिलवाने को यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रदेश भर के साहित्यकारों को आपसी संवाद व सृजन का सहारा लेकर इसे एक मिशन के रूप में लेना चाहिए। प्रदेश भर के साहित्यकारों का इस पर व्यापक मंथन निःसंदेह भविष्य के सकारात्मक संकेतों की ओर इंगित कर रहा है। दो दिवसीय मंथन का आज यह समापन नहीं अपितु भविष्य की सुखद परिकल्पनाओं की ये शुरुआत है। डा. देवेंद्र के अनुसार प्रत्येक जिले में क्रमवार ऐसे आयोजन किए जाने चाहिएं।  अध्यक्षीय भाषण में विद्यानंद ने कहा कि भाषायी मंथन एक सार्थक प्रयास है। हम सभी को पहाड़ी भाषा बोलने में परहेज नहीं करना चाहिए। प्रदेश भर से आए साहित्यकारों में डा. गौतम व्यथित, डा. पे्रम लाल गौतम, मदन हिमाचली, शंकर लाल शर्मा, डा. हेमराज कौशिक, शिव सिंह चौहान, रतन निर्झर, डा. जयदेव गुप्ता, लक्ष्मी दत्त शर्मा, योगेश्वर गौतम, नवीन लखनवी, अमरदेव अंगीरस, संतराम शर्मा, भीम सिंह चौहान, कौशल्या कंवर, कृष्ण चंद, रामलाल कौंडल, सतीश पाल, राजेंद्र कंवर, डा. दिनेश शिक्षार्थी, सेवा राम इत्यादि कई गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। इस मंथन शिविर के आयोजक सृजन मंच के संयोजक प्रो. नरेंद्र अरुण द्वारा लिखित एक स्मारिका का विमोचन भी निदेशक ने किया।
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