हिम साहित्यकार सहकार सभा
मकान सं० 210, रौड़ा सेक्टर 2,बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश 
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चिट्ठाजगत Blogvani.com हिमधारा
बिलासपुर : हिम कला संगम की ओर से कंदरौर में शनिवार को लोक गीत एवं लोक संस्कार गीतों के संरक्षण को लेकर चार दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनुपम शर्मा ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र की पहचान वहां की लोक संस्कृति पर निर्भर करती है। हिम कला संगम द्वारा लुप्त हो रही संस्कृति को जीवित रखने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय है। लोक संस्कारों को यदि समृद्ध संस्कृति की बुनियाद कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस आयोजन में विशेष रूप से उपस्थित चंडीगढ़ से आए प्रख्यात लेखक अनुवादक रतन चंद रत्नेश तथा हिम साहित्य सहकार सभा के प्रदेश अध्यक्ष रतन चंद निर्झर ने भी भाग लिया और लोक संस्कार गीतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस तरह के प्रयासों को आज के समय की आवश्यकता बताया और कला संगम को साधुवाद दिया। निर्झर ने इस अवसर पर अपनी चर्चित कविता खिंद भी सुनाई जिसे खूब सराहना मिली। संस्था के अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने कहा कि इस कार्यशाला में जहां लोक गीतों एवं लोक संस्कार गीतों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, विभिन्न विभागों द्वारा अपनी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला में महिला मंडल चकली, कंदरौर, खैरियां लुहणु, कुड्डी नोग, क्यारा, पंजैल, कलां पट्टा, भंदवाड़, चकली तरेड़, मियां बदलां, दोहला ब्राहम्णा, तरेड़, घुगराड़, देलग, धार टटोह, नाल्टी, बघड़, भराथू, खन्न दनोह महिला मंडल भाग ले रहे हैं। इसमें हिम कला संगम के वरिष्ठ कलाकार कौशल्या देवी, सीता देवी, जमना देवी, अंजू, वनिता देवी, सोनिया, यशपाल, लोक चंद, चमन लाल, हरि राम मुकेश के अलावा शिमला चंबा के कलाकार भी प्रशिक्षुओं को संगीत के गुर सिखाएंगे। इस अवसर पर गायत्री परिवार की ओर से संस्कारों पर चर्चा की गई
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